प्रथम शाही स्नान के लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर के घाट सुसज्ज
घाटपर
आगमन एवं निर्गमन के लिए अलग-अलग सेवा एवं पहुंच रास्ते की सुविधा
नासिक,
26 अगस्त ।
सिंहस्थ कुम्भ मेले के प्रथम शाही पर्व की तैयारी पूरी हो गई है । शाही स्नान के
लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर में बनाये गये घाट सज्ज हो गये है । इस घाट को
जोडनेवाली सेवा एवं पहुंच सडकों के कारण श्रद्धालुओं का आवागमन सहज एवं सुगम होगा । प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को शाही स्नान करने मे
कोई बाधा नहीं आयेगी, स्नान शांति से संपन्न हो सकेगा ।
सिंहस्थ मेले में शाही स्नान के
लिए देश-विदेश से लाखो भक्त नासिक और त्र्यबंकेश्वर आते हैं ।
भक्तों की सुविधा के लिए इस बार बहुत सुक्ष्म व्यवस्था की गई हैं । रामकुंड एवं
त्र्यबंकेश्वर के कुशावर्ता पर भक्तों की भीड़ कम करने हेतू नासिक में सात रामघाटों पर तथा
त्र्यबंकेश्वर में तीन घाटों पर स्नान का प्रबंध किया गया है । नासिक में रामकुंड, गौरी मैदान, टालकुटेश्वर, लक्ष्मीनारायण, टाकळी संगम, नांदूर एवं दसक पंचक इन सात
रामघाट पर तथा त्र्यंबकेश्वर में अहिल्या घाट, आचार्य श्री श्री चंद घाट, नवनाथ इन तीन घाटों पर
स्नान की व्यवस्था की गई हैं ।
बारह साल पहले संपन्न हुए कुंभ
मेले की अपेक्षा इस वर्ष नासिक एवं त्र्यबंकेश्वर के घाटों
की लंबाई में भारी परिवर्तन किये गये है । नासिक घाट की लंबाई 1290 मीटर से बढ़ाकर
3990 मीटर तथा त्र्यबंकेश्वर के घाट की लंबाई 200 मीटर से बढ़ाकर 950 मीटर कर दी
गई है। इस सुविधा से भक्तों को लाभ होगा ।
जलसंसाधन विभाग द्वारा नासिक एवं त्र्यबंकेश्वर शहरों के घाट
निर्माण के लिए घाट परिसर विकास, सेवा सड़क, जोड़ रास्ते तथा घाट विद्युतिकरण हेतु
169 करोड़ रुपये का प्रारूप तैयार किया गया था । उसी के तहत नाशिक में 2. 6 किलो
मीटर लंबे 7 घाट, त्र्यबंकेश्वर में 800 मीटर लंबे 5 घाटों का नये सिरे से निर्माण
किया गया । घाट के लिए समानांतर सड़क, रैम्प, पहुंच रास्ते के काम पूरे हो गये है ।
वे वॉटर बाउन्ड मेकॅनिक (डब्ल्यूबीएम) तकनीक द्वारा बनाये गये हैं । भक्तों
की भीड़ एवं भगदड़ टालने के उद्देश्य से प्रशासन ने भक्तों के आगमन एवं निर्गमन की
अलग अलग व्यवस्था सुनिश्चित की है ।
जलसंसाधन विभाग के सुपरिटेन्डेन्ट
इंजीनियर एम. के. पोकळे ने बताया कि, विभाग के लिए घाट के निर्माण की संकल्पना नई
थी । जलसंसाधन विभाग ने नासिक के मध्य संकल्प चित्र संगठन के
विशेषज्ञों से चित्र बनवाया । उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू हुआ । इंजीनियर सतत
स्तरीय काम करने की कोशिश में रहे । गुणवत्ता नियंत्रण एवं एक और अलग एजन्सीद्वारा
काम की जांच की गई । मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जलसंसाधन
मंत्री एवं कुम्भमेला मंत्री गिरीष महाजन, मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय आदि
गणमान्य ने घाट के काम की प्रशंसा की । इंजीनियर एम. के. पोकळे ने यह भी बताया कि
गोदावरी के पानी का बहाव बाधित न हो । किसी कारण वश यदि वह पानी दूषित हुआ तो उसे
बदलने की योजना भी बनाई गई है ।
घाट पर आने जाने के लिए अलग अलग व्यवस्था,
जोड़ एवं सेवा सड़कों, रैम्प आदि के निर्माण के कारण भक्तों को स्नान का आनंद
प्राप्त करना आसान एवं सुगम होगा । सुघड़, सुंदर घाटों के कारण नासिक एवं त्र्यंबकेश्वर का
परिसर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है ।
मार्ग
के अनुसार स्नान घाट एक नजर में...
नासिक स्थित सात घाट
§ मुंबई एवं त्र्यंबकेश्वर से
आनेवाले भक्तों के लिए लक्ष्मीनारायण रामघाट
§ त्र्यंबकेश्वर से पैदल
आनेवाले भक्तों के लिए गौरी मैदान
§ इंदौर,धुले सेआनेवाले भक्तों के लिए नांदूर-मानूर रामघाट
§ दिंडोरी से आनेवाले भक्तों
के लिए टालकुटेश्वर रामघाट
§ औरंगाबाद से आनेवाले भक्तों
के लिए नांदूर-मानूर व टाकळी संगम रामघाट
§ पुणे से आनेवाले भक्तों
के लिए दसक रामघाट
§ गिरणारे, दुगाव,पेठ से आनेवाले भक्तों
के लिए गांधी तलाव रामघाट
त्र्यंबकेश्वर स्थित तीन घाट
§ मुंबई, घोटी से आनेवाले भक्तों
के लिए नवनाथ घाट
§ ठाणे, जव्हार से आनेवाले भक्तों
के लिए अहिल्या घाट
§ नासिक एवं गिरणारे, रोहिले से आनेवाले भक्तों
के लिए आचार्य श्रीश्रीचंद घाट
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किशोर
गांगुर्डे, नासिक, 26 अगस्त 2015
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